Saturday, September 6, 2008

NARAZGI

हो अगर नाराज़ मुझसे ,तो

बैठे तो रहो मेरे दिल के पास,

बातें नही,मुलाकाते नही

रहा करो,कभी तो मेरे आँखों के पास !

जो है मुझको तेरे प्यार का झूठा गुमान

झूठा ही सही, जलने तो दो ये इक आस

हो कभी ऐसा यूँ भी की,

तुम भी तो आओ कभी मेरे होठो के पास !

ये किस नजरो से देखा है तुमने

कि तेरा देखना भी ,देखना न लगे आज

चाँद टुटा और बुझ गए सारे तारे

आयर भटक रहा हु तेरी रौशनी के पास